मनुष्य की प्रवृत्ति LIFE@DEATH#GOOGLE#FACEBOOK@TWITTER
मनुष्य की प्रवत्ति :-मनुष्य को सिर्फ अपने कर्म पर विश्वाश करना चाहिए। कुछ मनुष्य इतने श्रेष्ठ होते हैं जिनके सामने देवता भी फीके मालूम होते हैं। और कुछ इतने तुच्छ होते हैं कि उनके सामने शैतान भी फीका हो जाता है। याद रखिये जो मनुष्य स्वयं को देखेगा और अपने अंदर खूबियां विकसित करने की कोशिश करेगा तो वो निश्चित रूप से एक दिन ज़रूर श्रेष्ठ बन जाएगा। LIFE@DEATH#GOOGLE#FACEBOOK@TWITTER श्रेष्ठ पुरुष कभी भी दूसरों के दोषों को नहीं देखते बल्कि वो अपने अंदर के दोषों को दूर करने की कोशिश करते रहते हैं। मनुष्यका को कभी भी तीन चीज़ों से संतुष्ट नहीं होना चाहिए :-१ ज्ञान को हासिल करने में। २ईश्वर को याद करने में। ३ दान द...