आँख का आंसू (गम या ख़ुशी )tears in eyes(sadness or happiness)
आँख का आंसू (गम या ख़ुशी )
आज उसने जब मुझे कॉल की,तब मैं सो रहा था | उठते ही मैंने देखा कि तीन-तीन मिस्ड कॉल्स पड़ीं थीं | मिस्ड कॉल का जवाब देने के लिए मैंने तुरंत उसको कॉल की, पर कॉल का कोई आंसर नहीं मिला | कॉल का जवाब न मिलने की सूरत में मुझको उसकी बड़ी चिंता होने लगी, क्योंकि जो इंसान तुरंत कॉल को रिसीव करता हो या कॉल रिसीव न करने की सूरत में तुरंत कॉल वापस करता हो, उसकी चिंता होना स्वभाविक है |
फ़िलहाल मेरे अन्दर एक अनजाना-सा भय होने लगा था कि शायद कोई अनहोनी तो नहीं हो गयी, लेकिन रब का लाख-लाख शुक्र है,कि कोई ऐसी बात नहीं थी | लेकिन जब आप किसी को दिल से चाहते हैं तो आपको स्वयं ही उसकी चिंता होने लगेगी | चाहे वह कोई भी हो जैसे – मित्र, माता–पिता, भाई – बहन, पत्नी, प्रेमिका इत्यादि | कुछ देर बाद मेरे उस दोस्त की कॉल आई और मैंने उसको रिसीव किया, तो पता चला कि आज मेरे दोस्त की बहन की सगाई है, जिसकी तैयारी की वजह से उसने मुझे कॉल की थी, जो मैंने रिसीव नहीं कर पाई और ..............|
मैंने उसको तुरंत मुबारकबाद दी और फिर पूंछा,-“ क्या – क्या सामान आना हैं ? जल्दी से मुझे सामान की लिस्ट सेंड करो | उसने मुझे लिस्ट भेजी और फिर मैं शौपिंग के लिए निकल पड़ा, बाज़ार जाकर मैंने शौपिंग की और घर पहुंचा | सारे मेहमान तब आ चुके थे और सारी तैयारियां हो चुकी थीं | कहते हैं कि ,-“ बेटियां घरों की बरकतें होती हैं जिनके बिना घर का आँगन सूना – सूना होता है |” आज बहन की सगाई हो जायेगी और एक साल बाद शादी उसके बाद कहकर ....... उसकी माँ रोने लगीं, कुछ पल के लिए तो मुझे लगा कि क्या ये समय रोने – धोने का है पर नहीं माँ तो आखिर माँ होती है | मुझे नहीं पता था कि ये आंसू गम के हैं या ख़ुशी के | कुछ देर बाद सारी रस्में अदा की गयीं और जो मेहमान आये थे वह भी सब अपने कामों में लग गए जैसे खाना खाने में, दोस्तों से बात – चीत करने में आदि |
जिस वक़्त का यह खूबसूरत नज़ारा है, उस वक़्त सबको खुश देखकर मैं सबसे ज्यादा खुश हो रहा था, क्योंकि जिन भाईयों की बहनें होती हैं वह बहुत खुशनसीब होते हैं और उनको अपनी बहन की डोली उठाने का सौभाग्य प्राप्त होता है, इससे बढ़कर तो मुझको कोई नेकी नज़र नहीं आती, इन दोनों जहानों में | वक़्त गुजरता गया और फिर आखिर वह मुक़द्दस घडी आ ही गयी, जिसका सभी को बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था | शादी की तारीख पक्की की गयी और सभी रिश्तेदारों के यहाँ दावत बांटने का सिलसिला शुरू हो गया | तकरीबन एक महीने की ज़बरदस्त मेहनतों के बाद सारी तैयारियां पूरी हो गयीं और ............|
शादी का वह मुक़द्दस दिन आया और फिर दोपहर के बाद बारात आई | सबने खाना खाया और बाकीं रस्में अदा होने लगीं, निकाह हुआ और सभी ने दुल्हा – दुल्हन को अपनी अपनी दुआओं से नवाज़ा | सारी रस्में अदा होने के बाद जब विदाई का वक़्त आया तो सबकी आँखें भर आईं, उस वक़्त का यह मंज़र बड़ा ही दुखदाई था | कहतें हैं,-“ बेटियां तो सदा ही पराया धन होती हैं,उन्हें रोकर नहीं मुस्कुराकर विदा कीजिये |” इन आंसुओं की भी कोई ज़ात नहीं होती, पता ही नहीं चलता कि गम के हैं या खुशी के |
दोस्तों ! अपने सभी फ़र्ज़ मुस्कुराकर अदा कीजिये | सुख और दुःख तो आते ही रहेंगे | बस यही तो संसार का सबसे बड़ा सच है |
धन्यवाद !
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