रोगों का आगमन (sarkariresult.com) happiness and sadness
रोगों का आगमन मनुष्य के जीवन में :-
मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसको सर्वश्रेष्ठ होने की
उपाधि मिली है। मनुष्य के जीवन में सुखद और दुखद सूचनाओं का आवागमन लगा रहता है। इसी बात को ध्यान में रखकर हमें निश्चिन्त होकर अपना जीवन बिताना चाहिए। इसी में हमारी भलाई है। किसी ने सच ही कहा है कि मनुष्य को कामयाब होने के लिए उसके पास दो चीज़ों का होना बहुत ज़रूरी है।
१.स्वस्थ मष्तिष्क
२.निरोगी काया
जिस प्रकार से किसी लकड़ी को दीमक लग जाए तो वह दीमक उसको अंदर ही अंदर खोखला करती जाती है। ठीक उसी प्रकार से अगर किसी इंसान को रोग लग जाता है ,तो वह रोग उसको अंदर ही अंदर उसका पतन कर देता है और इंसान की सारी शक्ति का क्षय हो जाता है। मनुष्य को बर्वाद कर देता है और मनुष्य की सारी खुशियां छीन सी जाती हैं। और ऐसी हालत में उसको सुकून की तलाश रहती है मगर उसको सुकून नहीं मिलता है ,हर समय उसको एक बेचैनी सी रहती है।
दुसरे शब्दों में कहा जाए तो रोगो का आना अच्छा माना जाता है , क्योंकि मनुष्य को रोग पापों से मुक्त कर देता है।
रोगों के आने का कारण क्या है :-
मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसको यदि कुछ भी अधिक प्राप्त हो जाता है तो वह बिना घमंड करे नहीं रह सकता। दूसरो की हंसी और उनका मज़ाक उड़ाना उसकी आदत सी बन जाती है और यही आदत उसके विनाश का कारण बनती है। यदि हम किसी की मदद नहीं कर सकते तो हमें उसका मज़ाक भी उड़ाने का कोई हक़ नहीं होता है। हम मनुष्य हैं हमें एक दुसरे का दुःख -दर्द समझना चाहिए। जो लोग दूसरों की बेवसी का मज़ाक उड़ाते हैं ईश्वर उनको कभी माफ़ नहीं करता है।
किसी के रोग , कमज़ोरी का मज़ाक उड़ाने पर ईश्वर नाराज़ होता है इसी बात का अहसास कराने के लिए वह हमको रोग देता है। इसी लिए दोस्तों कभी भी किसी का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए और अपनी ताक़त का कभी भी गलत प्रयोग नहीं करना चाहिए।
मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसको सर्वश्रेष्ठ होने की
उपाधि मिली है। मनुष्य के जीवन में सुखद और दुखद सूचनाओं का आवागमन लगा रहता है। इसी बात को ध्यान में रखकर हमें निश्चिन्त होकर अपना जीवन बिताना चाहिए। इसी में हमारी भलाई है। किसी ने सच ही कहा है कि मनुष्य को कामयाब होने के लिए उसके पास दो चीज़ों का होना बहुत ज़रूरी है।
१.स्वस्थ मष्तिष्क
२.निरोगी काया
जिस प्रकार से किसी लकड़ी को दीमक लग जाए तो वह दीमक उसको अंदर ही अंदर खोखला करती जाती है। ठीक उसी प्रकार से अगर किसी इंसान को रोग लग जाता है ,तो वह रोग उसको अंदर ही अंदर उसका पतन कर देता है और इंसान की सारी शक्ति का क्षय हो जाता है। मनुष्य को बर्वाद कर देता है और मनुष्य की सारी खुशियां छीन सी जाती हैं। और ऐसी हालत में उसको सुकून की तलाश रहती है मगर उसको सुकून नहीं मिलता है ,हर समय उसको एक बेचैनी सी रहती है।
दुसरे शब्दों में कहा जाए तो रोगो का आना अच्छा माना जाता है , क्योंकि मनुष्य को रोग पापों से मुक्त कर देता है।
रोगों के आने का कारण क्या है :-
मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसको यदि कुछ भी अधिक प्राप्त हो जाता है तो वह बिना घमंड करे नहीं रह सकता। दूसरो की हंसी और उनका मज़ाक उड़ाना उसकी आदत सी बन जाती है और यही आदत उसके विनाश का कारण बनती है। यदि हम किसी की मदद नहीं कर सकते तो हमें उसका मज़ाक भी उड़ाने का कोई हक़ नहीं होता है। हम मनुष्य हैं हमें एक दुसरे का दुःख -दर्द समझना चाहिए। जो लोग दूसरों की बेवसी का मज़ाक उड़ाते हैं ईश्वर उनको कभी माफ़ नहीं करता है।किसी के रोग , कमज़ोरी का मज़ाक उड़ाने पर ईश्वर नाराज़ होता है इसी बात का अहसास कराने के लिए वह हमको रोग देता है। इसी लिए दोस्तों कभी भी किसी का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए और अपनी ताक़त का कभी भी गलत प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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