मनुष्य की प्रवृत्ति LIFE@DEATH#GOOGLE#FACEBOOK@TWITTER
मनुष्य की प्रवत्ति :-मनुष्य को सिर्फ अपने कर्म पर विश्वाश करना चाहिए। कुछ मनुष्य इतने श्रेष्ठ होते हैं जिनके सामने देवता भी फीके मालूम होते हैं। और कुछ इतने तुच्छ होते हैं कि उनके सामने शैतान भी फीका हो जाता है। याद रखिये जो मनुष्य स्वयं को देखेगा और अपने अंदर खूबियां विकसित करने की कोशिश करेगा तो वो निश्चित रूप से एक दिन ज़रूर श्रेष्ठ बन जाएगा।
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श्रेष्ठ पुरुष कभी भी दूसरों के दोषों को नहीं देखते बल्कि वो अपने अंदर के दोषों को दूर करने की कोशिश करते रहते हैं।
मनुष्यका को कभी भी तीन चीज़ों से संतुष्ट नहीं होना चाहिए :-१ ज्ञान को हासिल करने में। २ईश्वर को याद करने में। ३ दान देने में।
उपरोक्त चीज़ों में में ईश्वर ने बड़ी शांति राखी है। हर आदमी को इन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए।
श्रेष्ठ पुरुष कभी भी दूसरों के दोषों को नहीं देखते बल्कि वो अपने अंदर के दोषों को दूर करने की कोशिश करते रहते हैं।
मनुष्यका को कभी भी तीन चीज़ों से संतुष्ट नहीं होना चाहिए :-१ ज्ञान को हासिल करने में। २ईश्वर को याद करने में। ३ दान देने में।
उपरोक्त चीज़ों में में ईश्वर ने बड़ी शांति राखी है। हर आदमी को इन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए।
इन्सान ही वही प्राणी जो ईश्वर को बहुत ज्यादा पसंद है इसलिए अपने अन्दर गुणों का विकास करो और हमेशा दूसरों को लाभ पहुँचाओ |
जीवन में समस्याएं कभी भी ख़त्म नहीं होंगी ,लेकिन हमको उनके बीच तालमेल बिठाना होगा ,क्योंकि हम तो इंसान हैं और इंसान का जीवन ही संघर्षों से भरा हुआ है कहने का मतलब ये है दोस्तों जीवन का अर्थ ही है संघर्ष । ख़ुशी से जीवन यापन करें खुद भी खुश रहें और दूसरों को भी खुश रखें। जीवन भी एक वरदान है और वरदान सबको नहीं मिलता। इंसान को ईश्वर ने सबसे ज़्यादा ताक़त दी है जोकि किसी और प्राणी को नहीं मिली है। हमें खुद को हमेशाखुश और तनावमुक्त रखना चाहिए। मनुष्य बड़ा ही संवेदनशील प्राणी होता है, मनुष्य जो दूसरों को हमेशा खुश करने के लिए खुद को किन -किन मुसीबतों में दाल देता है ,दोस्तों हमें हमेशा खुद के विवेक से काम लेना चाहिए न कि दूसरों द्वारा की जाने वाली बातों पर।
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