REALITY OF LIFE (paisabazar.com)
जीवन बहुत ही अनमोल तोहफा है-
जीवन बहुत ही अनमोल तोहफा है जो कि ईश्वर के द्वारा हमको दिया गया है।जीवन को हमेशा मुस्कुरा के जीना चाहिए, क्योंकि जीवन की ये अनमोल घड़ियां न जाने कब खत्म हो जायें।
जीवन सुख और दुःख का एक ऐसा निकाय है, जिसमें सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख आता है। यह क्रिया जीवन के अंत तक चलती रहती है।

दुःख में मुस्कुराना बहुत ही बड़ा काम होता है, लेकिन यह बात भी बिल्कुल सत्य है कि रोने-पीटने से भी दुःख के बोझ को कम नहीं किया जा सकता।मनुष्य जीवन में दुःख का भी होना जरूरी है,क्योंकि अगर आपके जीवन में दुःख नहीं है तो आप के लिए सुख की कीमत कुछ न होगी।ईश्वर हमें दुःख इसलिए देता है क्योंकि हमें दूसरों के दुःख का अहसास हो जाये।
दुःख के आने के कारण-
मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जो बहुत ही विवेकवान होता है और उसको किसी से भी नहीं डरना चाहिए सिवाय ईश्वर के,लेकिन जब मनुष्य के अंदर घमंड, ईर्ष्या और क्रोध वास कर लेता है तो ये अवगुण ही उसके सुख के शत्रु हो जाते हैं,और मनुष्य का जीवन धीरे धीरे गमगीन हो जाता है, और उसके सारे सुख - चैन नष्ट होने लगते हैं।
मनुष्य को हमेशा अपने सुखों के साथ-साथ दूसरों के सुखों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इससे ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त होती है, और मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है।यदि आपने दूसरों के लिए अच्छा सोचा है, तो आपने अपना अच्छा होना निश्चित रूप से तय कर लिया है।जितना हो सके उतना हमें दूसरों के काम आना चाहिए।
दुःख का निवारण-
मनुष्य के जीवन में दुःख का होना तो तय होता है जिस प्रकार से सुख का होना।मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में निराश नहीं होना चाहिए, और उससे साहस के साथ लगातार मुकाबला करते रहना चाहिए।एक दिन ऐसा आयेगा जब सारे. जहाँ की खुशियां उसकेआंगन में होंगी।
मनुष्य को अपने अंदर ज्यादा से ज्यादा गुणों को उत्पन्न करने की कोशिश करते रहना चाहिए और दुर्गुणों को जल्द से जल्द त्यागने की कोशिश करनी चाहिए।
जीवन बहुत ही अनमोल तोहफा है जो कि ईश्वर के द्वारा हमको दिया गया है।जीवन को हमेशा मुस्कुरा के जीना चाहिए, क्योंकि जीवन की ये अनमोल घड़ियां न जाने कब खत्म हो जायें।
जीवन सुख और दुःख का एक ऐसा निकाय है, जिसमें सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख आता है। यह क्रिया जीवन के अंत तक चलती रहती है।

दुःख में मुस्कुराना बहुत ही बड़ा काम होता है, लेकिन यह बात भी बिल्कुल सत्य है कि रोने-पीटने से भी दुःख के बोझ को कम नहीं किया जा सकता।मनुष्य जीवन में दुःख का भी होना जरूरी है,क्योंकि अगर आपके जीवन में दुःख नहीं है तो आप के लिए सुख की कीमत कुछ न होगी।ईश्वर हमें दुःख इसलिए देता है क्योंकि हमें दूसरों के दुःख का अहसास हो जाये।
दुःख के आने के कारण-
मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जो बहुत ही विवेकवान होता है और उसको किसी से भी नहीं डरना चाहिए सिवाय ईश्वर के,लेकिन जब मनुष्य के अंदर घमंड, ईर्ष्या और क्रोध वास कर लेता है तो ये अवगुण ही उसके सुख के शत्रु हो जाते हैं,और मनुष्य का जीवन धीरे धीरे गमगीन हो जाता है, और उसके सारे सुख - चैन नष्ट होने लगते हैं।
मनुष्य को हमेशा अपने सुखों के साथ-साथ दूसरों के सुखों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इससे ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त होती है, और मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है।यदि आपने दूसरों के लिए अच्छा सोचा है, तो आपने अपना अच्छा होना निश्चित रूप से तय कर लिया है।जितना हो सके उतना हमें दूसरों के काम आना चाहिए।
दुःख का निवारण-
मनुष्य के जीवन में दुःख का होना तो तय होता है जिस प्रकार से सुख का होना।मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में निराश नहीं होना चाहिए, और उससे साहस के साथ लगातार मुकाबला करते रहना चाहिए।एक दिन ऐसा आयेगा जब सारे. जहाँ की खुशियां उसकेआंगन में होंगी।
मनुष्य को अपने अंदर ज्यादा से ज्यादा गुणों को उत्पन्न करने की कोशिश करते रहना चाहिए और दुर्गुणों को जल्द से जल्द त्यागने की कोशिश करनी चाहिए।



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